रायपुर.छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कलेक्टर गौरव कुमार सिंह इन दिनों प्रशासनिक संवेदनशीलता और जमीनी जुड़ाव के लिए चर्चा में हैं। सामने आई तस्वीर न केवल एक अधिकारी की ड्यूटी दिखाती है, बल्कि उस सोच को भी उजागर करती है, जिसमें पद नहीं, जनता प्राथमिकता होती है। तस्वीर में कलेक्टर गौरव कुमार सिंह स्कूलों में बच्चों को परोसे जा रहे मध्यान्ह भोजन का स्वाद स्वयं चखते नजर आ रहे हैं। यह केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि गुणवत्ता और बच्चों के पोषण को लेकर उनकी गंभीरता का प्रमाण है। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सरकारी योजनाएँ कागज़ों तक सीमित न रहें, बल्कि ज़मीनी हकीकत में भी असर दिखाएँ। इससे पहले मुंगेली जिले में कलेक्टर रहते हुए गौरव कुमार सिंह ने ग्रामीण अंचलों में जाकर ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएँ सुनीं। बिना किसी दिखावे या अहंकार के, सीधे संवाद के जरिए उन्होंने प्रशासन और आमजन के बीच की दूरी कम की। यही कारण है कि लोग उन्हें “जमीनी स्तर का आईएएस अफसर” कहकर संबोधित करते हैं। उनकी कार्यशैली यह संदेश देती है कि सुशासन का अर्थ सिर्फ आदेश देना नहीं, बल्कि स्वयं मैदान में उतरकर हालात समझना है। चाहे शिक्षा हो, पोषण हो या ग्रामीण समस्याएँ, कलेक्टर गौरव कुमार सिंह हर मोर्चे पर सक्रिय नजर आते हैं। कुल मिलाकर, यह तस्वीर और उनका कामकाज प्रशासन में मानवीय चेहरे की मिसाल पेश करता है, जहाँ पद की गरिमा बनी रहती है, लेकिन अहंकार के लिए कोई जगह नहीं होती।






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