March 14, 2026 4:43 pm

Home » छत्तीसगढ़ » शिक्षाकर्मियों को पिछली सेवा के आधार पर क्रमोन्नति देने से इनकार, याचिकाएं खारिज

शिक्षाकर्मियों को पिछली सेवा के आधार पर क्रमोन्नति देने से इनकार, याचिकाएं खारिज

115 Views

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारी नहीं हैं शिक्षाकर्मी

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पंचायत नियमों के तहत नियुक्त शिक्षाकर्मी तब तक ‘शासकीय सेवक’ नहीं माने जा सकते, जब तक उनका स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन नहीं हो जाता। न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि शिक्षा कर्मी अपनी पिछली पंचायत सेवा के आधार पर 10 मार्च 2017 के सर्कुलर के अनुसार क्रमोन्नति लाभ के हकदार नहीं हैं, क्योंकि यह नियम केवल नियमित सरकारी कर्मचारियों पर लागू होता है। इसके साथ ही इस संदर्भ में दायर सभी 1188 याचिकाएं कोर्ट ने खारिज कर दीं। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने आभा नामदेव व अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य और अन्य जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिया। याचिकाकर्ता मूल रूप से मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ पंचायत शिक्षा कर्मी नियमों 1997, 2007 और 2012 के तहत विभिन्न पंचायतों द्वारा शिक्षा कर्मी वर्ग-1, 2 और 3 रूप में नियुक्त किए गए थे। वे लगातार पंचायत कर्मी या पंचायत शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

राज्य सरकार की 30 जून 2018 की नीति के अंतर्गत 1 जुलाई 2018 को इन शिक्षकों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन कर लिया गया।

प्रथम व द्वितीय क्रमोन्नति की मांग

शिक्षाकर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर मांग की थी कि उनकी 10 वर्ष की सेवा पूरी होने पर उन्हें प्रथम और द्वितीय क्रमोन्नति का लाभ दिया जाए। उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी 10 मार्च 2017 के सर्कुलर का हवाला दिया और सोना साहू बनाम छत्तीसगढ़ राज्य मामले में डिवीजन बेंच के फैसले को आधार बनाया। उन्होंने रवि प्रभा साहू केस का भी उदाहरण दिया और कहा कि यदि सिंगल बेंच इससे सहमत नहीं है, तो मामले को बड़ी बेंच को भेज दिया जाए।

 

 

राज्य ने कहा- पंचायत शिक्षकों का कैडर अलग : अतिरिक्त महाधिवक्ता ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि शिक्षाकर्मी स्थानीय निकायों (पंचायतों) द्वारा नियुक्त किए गए थे और उनका कैडर नियमित सरकारी शिक्षकों से अलग था। सरकार ने दलील दी कि 1999 की क्रमोन्नति योजना और 2017 का सर्कुलर केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए है।राज्य ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता 1 जुलाई 2018 को संविलियन के बाद ही सरकारी सेवक बने हैं। जस्टिस व्यास ने पंचायत राज अधिनियम, 1993 और भर्ती नियमों का विस्तृत विश्लेषण किया। कोर्ट ने पाया कि पंचायतों द्वारा नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा शर्तें स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों से बिल्कुल भिन्न थीं।

live36garh
Author: live36garh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *