पूजन सामग्री लेने प्रतिनिधि मंडल जगन्नाथ पुरी रवाना
सरायपाली :- फुलझर अंचल के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल गढ़फुलझर में नवनिर्मित श्री रणेश्वर मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए आंचलिक सभा सरायपाली की आवश्यक बैठक रामचंडी भवन झिलमिला में रखी गई जिसकी अध्यक्षता आंचलिक उपाध्यक्ष जयंत बारीक ने की। बाबा बिशासहे कुल कोलता समाज के आराध्य देव रणेश्वर भगवान को समर्पित इस भव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर कोलता समाज में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। प्राण प्रतिष्ठा को भव्य और आकर्षक रूप प्रदान करने के लिए समाज के लोग न सिर्फ आर्थिक रूप से सहयोग कर रहे हैं बल्कि तन मन से लगे हुए हैं। मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह 23 से 27 मार्च तक गढ़ फुलझर स्थित रामचंडी मंदिर परिसर में आयोजित हो रहा है।

चारों दिशाओं से निकलेगी चार भव्य रथ यात्रा
प्राण प्रतिष्ठा समारोह को भव्यतम रूप प्रदान करने के लिए चार दिशाओं से विशाल चार रथ यात्रा निकलेगी । पूर्व से पूजा रथ यात्रा, पश्चिम से ध्वजा रथ यात्रा, उत्तर से मूर्ति रथ यात्रा एवं दक्षिण से कलश रथ यात्रा निकलेगी। पूजा रथ यात्रा की जिम्मेदारी आंचलिक सभा सरायपाली को दी गई है जिसका प्रभारी आंचलिक अध्यक्ष प्रदीप साहू को बनाया गया है। जिनके नेतृत्व में समस्त शाखा सभापति एवं कुल कार्यकारिण पदाधिकारीगण सहयोग प्रदान करेंगे। आंचलिक सचिव भूपेंद्र भोई ने जानकारी देते हुए बताया कि पूजा सामग्री लेने के लिए अंचलिक अध्यक्ष प्रदीप साहू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल जगन्नाथ पूरी गया हुआ है। जहां से पूजन सामग्री लाकर रथ यात्रा के माध्यम से गढ़ फुलझर पहुंचाया जाएगा। रथ यात्रा को लेकर शाखा सभा को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। समाज के लोग 22 मार्च को करीब 11:00 बजे नई मंडी प्रांगण में एकत्रित होंगे जहां भोजन पश्चात रैली की शक्ल में नगर के मुख्य मार्ग होते हुए घंटेश्वरी मंदिर तक जाएगी। जहां से शाम को गढ़फुलझर पहुंचेगी। यात्रा के आगे आगे युवा प्रकोष्ठ के युवाओं द्वारा मोटरसाइकिल रैली निकाली जाएगी। उनके पीछे डीजे, झांकी, कर्मा नर्तक दल, कीर्तन मंडली, शबरदा, निशान बाजा, घंटपार्टी के साथ संगीतमय भव्य रैली निकाली जाएगी।
जुगार यात्रा होगी आकर्षण का मुख्य केंद्र
सचिव ललित साहू ने बताया कि रणेश्वर मंदिर का ध्वज महाकाल की नगरी उज्जैन से ला कर चढ़ाया जायेगा। तो वहीं कलश नरसिंहनाथ से, पूजा सामग्री जगन्नाथ पुरी से पहुंचेगा तो मूर्ति नर्मदेश्वर से लाकर स्थापित किया जायेगा। सरायपाली से निकलने वाली पूजा रथ यात्रा में बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं उड़िया परिधान धारण किए भगवान को समर्पित होने वाले जुगार ( गुड़ और लाइ से बनाया गया विशेष प्रसाद) धारण कर यात्रा में सम्मिलित होंगी। जुगार यात्रा आकर्षण का मुख्य केंद्र होगा। इस पूजा रथ यात्रा में सम्मिलित होना एक ऐतिहासिक क्षण होगा। अधिक से अधिक संख्या में सामाजिक जनों को इस यात्रा में सम्मिलित होने की अपील की गई है। बैठक में आंचलिक पदाधिकारी जयंत बारीक, भूपेन्द्र भोई,झिलमिला सभापति सुरेंद्र साहू, तोरेसिंहा सभापति देवार्चन प्रधान, भोथलडीह सभापति सत्यानंद प्रधान ,बांझापाली सभापति कुलमणि बारीक,कुल कार्यकारिणी पदाधिकारी सुभाष प्रधान, ललित साहू, दिलीप भोई, कमलेश साहू, रामलाल साहू, हेमसागर प्रधान, शैलेंद्र साहू,जयकुमार बारीक, निर्मल प्रधान, सेवाराम भोई, देवराज प्रधान, कुलवंत बारीक, भीष्मदेव प्रधान,हेमसागर विशाल आदि बड़ी संख्या में सामाजिक जन उपस्थित थे।
भगवान श्री राम से जुड़ा है कोलता समाज का इतिहास
कोलता समाज के कुल कार्यकारिणी अध्यक्ष गिरधारी साहू ने बताया कि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के वृहद आयोजन को देखते हुए व्यापक तैयारी की जा रही है। गढ़फुलझर के ऐतिहासिक एवं प्राचीन किले पर कोलता समाज की आराध्य देवी माँ रामचंडी का भव्य मंदिर स्थित है। 19 मार्च से नवरात्र प्रारम्भ हो रहा है। माँ रामचंडी माँ दुर्गा का ही एक रूप है जिसे श्री रामचंद्र जी लंका विजय के पूर्व 9 दिनों तक विशेष पूजा की थी उसी देवी को माँ रामचंडी के रूप में गढ़ फुलझर में स्थापित कर कोलता समाज पूजा कर रहा है। यह मंदिर न सिर्फ कोलता समाज के लिए बल्कि सर्व समाज के लिए आस्था का केंद्र बन चुका है। समाज के संरक्षक हरिचरण प्रधान ने बताया कि कोलता समाज का इतिहास भी भगवान श्री राम से जुड़ा हुआ और भगवान श्री राम को अपना आराध्य देव मानता है। इसलिए रावण को पराजित करने के लिए रामचंद्र जी ने रामेश्वरम में जिस शिव भगवान की स्थापना की थी उसे ही श्री रणेश्वर भगवान के रूप में कोलता समाज पूजता आ रहा है। फूलझर अंचल में बड़ी संख्या में कोलता समाज निवासरत है। गढ़फुलझर में आराध्या देवी तो स्थापित हो गई मगर यहां रणेश्वर मंदिर की कमी हमेशा खलती रही। समाज की संकल्प शक्ति और सहयोग भावना से एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया जिसकी प्राण प्रतिष्ठा समारोह होने की प्रतीक्षा में पूरा समाज ही नहीं अंचल के लोग भी हैं। विश्वास है कि इस मंदिर को न सिर्फ फुलझर अंचल में ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में एक अद्भुत, अलौकिक, अद्वितीय मंदिर के रूप में प्रसिद्ध मिलेगी।





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