सरायपाली। छत्तीसगढ़ में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के शुल्क समेत 22 अन्य मदों में लगभग दोगुनी की गई बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस फैसले को सीधे तौर पर शिक्षा विरोधी करार देते हुए भाजपा सरकार पर गरीब छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है।
पूर्व जिलाध्यक्ष कांग्रेस असंगठित क्षेत्र समस्या निवारण प्रकोष्ठ ने कहा कि परीक्षा पर चर्चा का नारा देने वाली भाजपा सरकार अब परीक्षा को ही महंगा बना रही है। जफर उल्ला ने कहा कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता पर यह फैसला सीधा कुठाराघात है। फीस बढ़ोतरी के बाद सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और मध्यम परिवार वर्ग के छात्रों को होंगी । परीक्षा शुल्क बढ़ने से अभिभावकों की जेब पर भी सीधा असर पड़ा है। हम सरकार से मांग करते है कि बोर्ड परीक्षा शुल्क में की गई बढ़ोतरी को तत्काल वापस लिया जाए और छात्रों को राहत दी जाए। कांग्रेस पूर्व जिलाध्यक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार यह बताए कि आखिर फीस में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की जरूरत क्यों पड़ी। दसवीं-बारहवीं की नियमित परीक्षा फीस को 460 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये कर दिया गया है। नामांकन शुल्क 80 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया, जबकि अतिरिक्त विषय की फीस 110 रुपये से 250 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह सम्पूर्ण विषय शुल्क 1230 रुपये से बढ़ाकर 1600 रुपये किया गया है। एक विषय की फीस 280 से 500 रुपये, दो विषय की फीस 340 से 600 रुपये, परीक्षा केंद्र परिवर्तन शुल्क 240 से 400 रुपये कर दिया गया है। स्वाध्यायी छात्रों के लिए विलंब शुल्क 770 से 1000 रुपये और विशेष विलंब शुल्क 1540 से बढ़ाकर 2000 रुपये तक कर दिया गया है। कांग्रेस का कहना है,कि इन सभी बढ़ोतरी का सीधा असर गरीब छात्रों पर पड़ रहा है। जफर उल्ला ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि जिस डबल इंजन सरकार ने जनता को राहत देने का वादा किया था,वही जनता के लिए ‘ट्रबल इंजन’ बन चुकी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आम लोगों को आर्थिक राहत दी जाती थी, लेकिन भाजपा सरकार बनते ही शिक्षा की फीस लगभग दोगुनी कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली बिल हाफयोजना में 400 यूनिट की छूट खत्म कर दी गई, जमीन रजिस्ट्री में मिलने वाली 30 प्रतिशत छूट समाप्त कर दी गई और गाइडलाइन दरों में भी भारी बढ़ोतरी कर दी गई। कांग्रेस नेता ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छात्रों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था, लेकिन अब भाजपा सरकार छात्रों से भी फीस वसूल रही है।






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