February 4, 2026 7:29 am

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भारत में जल्द उपलब्ध होगा एचआईवी रोकने वाला इंजेक्शन

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अमेरिका के मुकाबले हजार गुना कम होगी कीमत, 2 दवा कंपनियां करेंगी जेनरिक लॉन्च

सालभर की खुराक की कीमत होगी 3,549, जबकि अमेरिका में यह 17 लाख रुपये से ज्यादा है

दवा एचआईवी और एड्स रोकने में लगभग 100% प्रभावी

नई दिल्ली। एजेंसी। एचआईवी और एड्स रोकथाम के क्षेत्र में भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। अब वह इंजेक्शन, जिसे अमेरिका में लाखों रुपये में बेचा जा रहा है, भारत में बेहद सस्ती कीमत पर उपलब्ध होगा। यह दवा न सिर्फ एड्स रोकने में लगभग सौ प्रतिशत कारगर है बल्कि लोगों को रोजाना गोलियां खाने की परेशानी से भी बचाएगी। हैदराबाद की हेट्रो फार्मा और HIV डॉ. रेड्डीज लैब ने अंतरराष्ट्रीय परोपकारी संस्थाओं गेट्स फाउंडेशन और यूनिटेड (जो डब्ल्यूएचओ और क्लिंटन हेल्थ एक्सेस इनिशिएटिव द्वारा संचालित है) के सहयोग से घोषणा की है कि वे भारत समेत 120 देशों में जेनरिक लेनाकापाविर लाँच करेंगी।

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कितनी सस्ती होगी यह दवा?

अमेरिका में इस इंजेक्शन की शुरुआती कीमत 42,250 डॉलर (करीब 35.38 लाख रुपये) सालाना तय की गई थी। आलोचना के बाद इसे घटाकर आधा कर दिया गया, लेकिन आम लोगों की पहुंच से यह अब भी बाहर है। इसके उलट भारत में सालभर की खुराक की कीमत होगी महज 3,549 रुपये (करीब 40 डॉलर)। यानी अमेरिका की तुलना में हजार गुना से से भी कम।

लाइसेंसिंग समझौता दिया था। इस लाइसेंस के तहत निम्न और मध्यम आय वाले देशों में जेनरिक लेनाकापाविर बनाया और बेचा जा सकेगा। भारत, जो पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा जेनरिक दवाओं का केंद्र है, इस साझेदारी से वैश्विक स्तर पर बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है।

साल में सिर्फ दो बार लगेगा इंजेक्शन

लेनाकापाविर को कैलिफोर्निया की गिलियड साइंसेस ने विकसित किया है और इसे सनलेंका ब्रांड नाम से यूरोप और अमेरिका में पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। खास बात यह है कि यह इंजेक्शन साल में सिर्फ दो बार दिया जाता है। इसे प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीआरईपी) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह रोजाना की ओरल पीआरईपी दवाओं की तुलना में कहीं अधिक आसान और असरदार विकल्प है। इससे रोज-रोज दवा लेने की झंझट और उससे जुड़ा सामाजिक कलंक दोनों खत्म हो जाते हैं।

भारत में भी तेजी से बढ़ रहा एचआईवी संक्रमण : भले ही वैश्विक स्तर पर एचआईवी और एड्स से लड़ाई लगातार जारी है, हर साल अब भी 1.3 मिलियन नए मामले सामने आते हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। साल 2023 में देश में 68,451 नए एचआईवी संक्रमण दर्ज किए गए। इनमें से ज्यादातर मामले कुछ राज्यों में ज्यादा पाए गए। ऐसे में यह इंजेक्शन भारत के लिए जीवनदायी साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय

एचआईवी विशेषज्ञ और पीएचओ महासचिव डॉ. इश्वर गिलाडा कहते हैं कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। जेनरिक लेनाकापाविर से एचआईवी की रोकथाम सस्ती, ॥ असरदार और सभी जरूरतमंदों के ॥ लिए सुलभ होगी।

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Author: live36garh

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