रायपुर.राज्य के उदंती-सीवानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) में जल्दी ही वन भैंसा सफारी बनेगी। इसके लिए वनभैंसों की संख्या में इजाफा करने के लिए 3 वनभैंस को बारनवापारा से यूएसटीआर में शिफ्ट किया जाएगा। साथ ही उनके संरक्षण संवर्धन और संख्या में इजाफा होने के बाद पर्यटकों को सैर कराई जाएगी। वन विभाग के अधिकारी इसकी तैयारियों में जुट गए हैं।
सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था
वनपैसों की निगरानी करने के लिए रेडियो कॉलर लगाने के बाद जंगल में छोड़ने को योजना बनाई गई है। साथ ही लोकेशन ट्रेस करने कर स्थानीय ग्रामीणों के मोबाइल नंबरों को ऐप से कनेक्ट कर सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की जाएगी। यूएसटी आर के उपनिदेशक जैन ने बताया कि वनपैसों की संख्या बढ़ाने के लिए खाका तैयार किया गया है। असम से लाए गए प्योर मादा वनभैसी को लाने के को लाने के बाद छोटू वनभैंस से प्रजनन (मेटिंग) कराई जाएगी। ताकि उनकी संख्या को बढ़ाया जा सके।
वन भैंसा की संख्या 11
असम से 2020 में 1 नर और 1 मादा 2020 में 4 मादा वनभैंस को लाने के बाद बारनवापारा अभयारण्य स्थित बाड़े में रखा गया था। यहां अब उनकी संख्या हो गई है। इनकी संख्या बढ़ाने लिए बारनवापारा से 3 मादा वनभैंसों के यूएसटीआर लाने के बाद 45 दिन बाड़े में रखा जाएगा। इसके बाद जंगलों को विवरण करने के लिए कोर एरिया में छोड़ जाएगा। जाकि वह स्वजेंद वातवरण में रह सके।
स्थानांतरण एवं अनुमतियों की प्रक्रिया तेज करने का निर्णय
हाल ही में हुई बैठक में यह सुनिश्चित किया गया कि वन भैंसों के स्थानांतरण के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से आवश्यक अनुमतियाँ शीघ्र प्राप्त की जाएँगी। इसके लिए एक विशेष दल (डेलिगेशन) को जल्द ही दिल्ली भेजा जाएगा।
वन भैंसों की चिकित्सा देखभाल हेतु दो पशु चिकित्सकों को पूर्णकालिक रूप से उपलब्ध रखने का निर्णय लिया गया ताकि स्थानांतरण एवं संरक्षण के दौरान उनके जीवन एवं स्वास्थ्य को कोई जोखिम न हो। साथ ही सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) से अनुमति लेकर जंगल सफारी व अन्य स्थानों पर सैटेलाइट-आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
काला हिरण (कृष्ण मृग) संरक्षण पर भी चर्चा
बैठक में राज्य में काला हिरण (Blackbuck) के संरक्षण और संख्या वृद्धि पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि लगभग 50 वर्षों के बाद वर्ष 2018 में बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में काला हिरण पुनर्स्थापन कार्यक्रम शुरू किया गया था।
संरक्षण कार्यों के तहत बाड़ों में रेत व जल निकासी प्रणाली में सुधार,पोषण की निगरानी,समर्पित संरक्षण टीम की तैनाती जैसे कार्य किए गए। इसके परिणामस्वरूप वर्तमान में बारनवापारा में लगभग 190 काले हिरण मौजूद हैं। इस सफलता को देखते हुए अन्य अभयारण्यों में भी काले हिरण को पुनर्स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।






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