सरायपाली। क्षेत्र में धान की अवैध तस्करी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। ताजा मामले में 8 जनवरी को सारंगढ़ जिले से महासमुंद जिले की ओर अवैध रूप से धान का परिवहन करते हुए एक माजदा वाहन को राजस्व विभाग की टीम ने पकड़ा। इस कार्रवाई में माजदा वाहन से 70 कट्टा धान जब्त किया गया, जिसे सरायपाली थाना के सुपुर्द किया गया है। जब्त धान सालर निवासी प्रकाश अग्रवाल का बताया जा रहा है, जबकि वाहन किसी अन्य के नाम पर पंजीकृत है। जिसमें धान सरायपाली विकासखंड के दामोदरहा क्षेत्र में खपाने के लिए भेजा जा रहा था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार धान तस्कर जानबूझकर ऐसे वाहनों का उपयोग कर रहे हैं, जिनका फिटनेस टैक्स और इंश्योरेंस फेल है और जो सड़क पर चलने योग्य नहीं हैं। इसके बावजूद इन वाहनों से धड़ल्ले से धान की तस्करी की जा रही है। 8 जनवरी को पकड़े गए माजदा वाहन क्रमांक सीजी 13 युएच 7765 की परिवहन विभाग द्वारा जांच कराई गई, जिसमें सामने आया कि वाहन की फिटनेस, पंजीयन प्रमाण पत्र, टैक्स और बीमा सभी की अवधि समाप्त हो चुकी है।
यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। धान के अवैध रूप से परिवहन के मामलों में जिन वाहनों को पकड़ा जा रहा है, उन्हें आरटीओ विभाग के सुपुर्दनामें में क्यों नहीं किया जा रहा है। धान के अवैध रूप से परिवहन पर पकड़े गए वाहनों में से अधिकांश वाहन सड़क पर चलने के योग्य नहीं हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इससे पहले भी कई ऐसे वाहन पकड़े गए होंगे, जिनकी फिटनेस, आरसी, टैक्स और बीमा की वैधता समाप्त हो चुकी होगी, लेकिन उनकी समुचित जांच नहीं की गई। नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में वाहन मालिक और चालक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, परंतु प्रशासन की ओर से इस दिशा में अपेक्षित कठोरता नजर नहीं आ रही है।
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यदि प्रत्येक पकड़े गए वाहन की परिवहन विभाग से पूरी जांच कराई जाए और अवैध धान परिवहन, एक्सपायरी टैक्स तथा राजस्व हानि के मामलों में एफआईआर दर्ज कर राजसात की कार्रवाई की जाए, तो अवैध धान तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि इस वर्ष अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनुपमा आनंद (आईएएस) के निर्देशन में जिस तरह से कार्रवाई की गई है, वैसी कार्रवाई पिछले 10 वर्षों में शायद ही देखने को मिली हो। यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल धान जब्त करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जब तक वाहन चालकों, मालिकों और तस्करों पर एफआईआर दर्ज कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती और फिटनेस, टैक्स,बीमा जैसी शर्तों का उल्लंघन करने वाले वाहनों से शासन को हुए लाखों रुपये के नुकसान की भरपाई नहीं कराई जाती, तब तक अवैध धान परिवहन पर पूरी तरह रोक लगना मुश्किल है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई कर भविष्य में अवैध तस्करी को नगण्य स्तर तक लाया जाए।






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