मुक्ति धाम सेवा समिति के सेवाभावी युवाओं ने मानवता और श्रमदान की लिखी प्रेरणादायी कहानी

पिथौरा
जब सड़क हादसे में दम तोड़ने वाले एक अज्ञात शख्स को जब कोई कंधा देने वाला नहीं मिला, तो पिथौरा की ‘मुक्ति धाम सेवा समिति’ ने आगे बढ़कर न सिर्फ उस लावारिस लाश को कंधा दिया, बल्कि पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार कर इंसानियत का फर्ज निभाया। यह दिल छू लेने वाली घटना सांकरा थाना क्षेत्र के ग्राम बल्डीडीही नेशनल हाईवे की है, जहां बीती 16 जून की रात एक अज्ञात वाहन ने एक व्यक्ति को कुचल दिया था, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
पिथौरा पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत शव का पंचनामा और पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद जब शव की शिनाख्त नहीं हो सकी, तो पुलिस ने नगर की सेवाभावी संस्था ‘मुक्ति धाम सेवा समिति’ से संपर्क किया। सूचना मिलते ही समिति के मुखिया अमृतपाल सिंह छाबड़ा ने तुरंत अपने साथियों को लामबंद किया। समिति के सदस्यों ने अज्ञात शव का पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ दाह संस्कार कर मृतात्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस पुनीत कार्य में गोल्डी भैया के साथ राजेश कोठारी और बंटी छत्तीसगढ़िया का विशेष सहयोग रहा।

# लावारिसों के लिए हमेशा ‘मसीहा’ बनती है यह समिति
पिथौरा के लोगों के लिए मुक्ति धाम सेवा समिति का यह रूप नया नहीं है। समिति इससे पहले भी कई बार लावारिस और अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार कर चुकी है। जब भी पुलिस या प्रशासन के सामने ऐसी लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार की चुनौती आती है, अमृतपाल सिंह छाबड़ा गोल्डी भैया और उनकी टीम बिना किसी झिझक के सामने आकर ‘अपनों’ की तरह अंतिम विदाई की जिम्मेदारी संभालती है।
शासकीय चीर घर (मरचुरी) का भी कर रहे कायाकल्प
समिति का सेवा भाव सिर्फ श्मशान घाट तक ही सीमित नहीं है। संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए यह समिति **शासकीय चीर घर (मर्चुरी) की साफ-सफाई से लेकर रंग-रोगन आदि का कार्य भी बिना किसी सरकारी सहयोग के लगातार करती आ रही है। इसी कड़ी में कुछ दिन पूर्व ही समिति के सदस्यों ने चीर घर के साथ-साथ उसके आस-पास के पूरे कैंपस की सघन सफाई की, जिससे उपेक्षित पड़े रहने वाले इस सरकारी भवन की सूरत बदल गई है।**

### बिना सरकारी मदद के किया कायाकल्प: जनसहयोग से संवारी श्मशान की भूमि
मुक्ति धाम सेवा समिति ने पिथौरा के मुक्तिधाम (श्मशान घाट) की भी पूरी सूरत बदल कर रख दी है। समिति के बंटी छत्तीसगढ़िया बताते है की सबसे खास बात यह है कि इस कायाकल्प के लिए समिति ने शासन-प्रशासन से फूटी कौड़ी की भी मदद नहीं ली।
बीते कई वर्षों से यह समिति जनसहयोग और अपनी जेब से पैसे खर्च कर मुक्तिधाम में जरूरत की हर सामग्री जुटा रही है। श्मशान घाट में आने वाले लोगों को असुविधा न हो, इसके लिए समिति ने वहां सुंदर चबूतरों का निर्माण कराया है, परिसर का रंग-रोगन कराया है और बैठने व पानी की मुकम्मल व्यवस्था की है। जो श्मशान घाट कभी उपेक्षित पड़ा रहता था, वह आज इस समिति की बदौलत बेहद व्यवस्थित नजर आता है।
### ‘संडे मतलब श्मशान की सफाई’: नगर के युवा हर रविवार को करते हैं कार सेवा
इस सेवा भाव की सबसे खूबसूरत तस्वीर हर रविवार को देखने को मिलती है, जो अब एक प्रेरणादायी कहानी बन चुकी है। पिथौरा नगर के जागरूक और सेवाभावी युवा सेवा के दीवाने ग्रुप के द्वारा हर रविवार की सुबह अपनी छुट्टी का आनंद लेने के बजाय सीधे मुक्तिधाम पहुंचते हैं।
युवाओं की यह टोली हर रविवार को वहां ‘कार सेवा’ श्रमदान करती है। पूरे परिसर की साफ-सफाई करना, झाड़ियों को काटना, पौधों को पानी देना और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना इन युवाओं की साप्ताहिक दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। युवाओं का यह जज्बा यह साबित करता है कि अगर नीयत साफ हो और दिल में सेवा का भाव हो, तो बिना सरकारी बजट का रोना रोए भी समाज में इतना बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

मुक्ति धाम सेवा समिति का यह मानवीय और अनुकरणीय कार्य आज पूरे महासमुंद जिले में चर्चा और तारीफ का विषय बना हुआ है।






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