सॉफ्ट रोबोटिक्स और स्मार्ट सामग्री पर कर रहे शोध, स्टैनफोर्ड के शोधकर्ताओं के सहयोग से तैयार सूची में मिली जगह
सरायपाली। छोटे से गांव अर्जुंड़ा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जगत में पहचान बनाने वाले डॉ. नीरज कुमार भोई ने सरायपाली और छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। अर्जुंड़ा निवासी अश्विनी कुमार भोई के पुत्र डॉ. नीरज का नाम विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हुआ है। वे रायगढ़ स्थित ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के सहयोग से तैयार और एल्सेवियर द्वारा प्रकाशित इस सूची में जगह मिलना उनके शोध कार्य और वैज्ञानिक योगदान की अंतरराष्ट्रीय पहचान है।
रोबोटिक्स और स्मार्ट तकनीक पर फोकस
डॉ. नीरज का शोध सॉफ्ट रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, स्मार्ट सामग्री, 3डी प्रिंटिंग और पुनर्वास तकनीकों पर केंद्रित है। वे ऐसे लचीले रोबोटिक उपकरण विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिनका उपयोग हाथों के पुनर्वास, नाजुक वस्तुओं को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और आधुनिक विनिर्माण प्रणालियों में किया जा सके। स्मार्ट पॉलिमर कंपोजिट और सेंसर आधारित तकनीकों के जरिए इंजीनियरिंग को अधिक उपयोगी और प्रभावी बनाना भी उनके शोध का हिस्सा है।
बीआईटी दुर्ग से पीएचडी तक का सफर
डॉ. नीरज ने भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दुर्ग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया। इसके बाद वीर सुरेंद्र साई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, बुर्ला से प्रोडक्शन इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने आईआईआईटीडीएम, जबलपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनका डॉक्टरेट शोध माइक्रोवेव प्रोसेसिंग और एल्युमीनियम मेटल मैट्रिक्स कंपोजिट के निर्माण एवं परीक्षण से संबंधित रहा है। वे बनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान में भी अध्यापन और अनुसंधान कार्य कर चुके हैं।
शोध प्रभाव के आधार पर वैज्ञानिकों का चयन
वैज्ञानिकों की इस सूची में उद्धरणों (साइटेशन), एच-इंडेक्स और अन्य मानकीकृत शोध संकेतकों के आधार पर उनके अनुसंधान के प्रभाव का मूल्यांकन किया जाता है। इस उपलब्धि से डॉ. नीरज के शोध कार्य को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है।
अर्जुंडा से शुरू हुआ उनका सफर आज अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंच तक पहुंच गया है। उनकी सफलता क्षेत्र के विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों के लिए प्रेरणा है। सॉफ्ट रोबोटिक्स और पुनर्वास इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनका शोध भविष्य में चिकित्सा सहायता और आधुनिक तकनीक के विकास में उपयोगी साबित हो सकता है।






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