अफवाहों पर लगा विराम, मानसून से निपटने जल संसाधन विभाग मुस्तै
रायपुर.छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक जल संरचनाओं के मुकुटमणि और गंगरेल जलाशय के मुख्य मददगार मुरूमसिल्ली बाँध को लेकर सोशल मीडिया पर तैर रहीं तमाम तरह की आशंकाएं पूरी तरह बेबुनियाद और भ्रामक हैं। जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 103 साल पुराना यह ऐतिहासिक बाँध पूरी तरह सुरक्षित, अडिग और मजबूत है। मानसून की आहट के बीच बाँध की दीर्घकालिक सुरक्षा और जल प्रबंधन को लेकर विभाग न केवल सतर्क है, बल्कि विशेषज्ञ अभियंताओं की देखरेख में नियमित तकनीकी परीक्षण और मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
दरअसल, मानसून के आगमन के साथ ही बांधों की सुरक्षा को लेकर कई तरह की अफवाहें सिर उठाने लगती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की तथ्यहीन खबरों का शिकार न हों और केवल अधिकृत सूचनाओं पर ही विश्वास करें।
शीर्ष तकनीकी टीम ने परखी एक-एक दीवार
परियोजना की संवेदनशीलता और इसके महत्व को देखते हुए हाल ही में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता के नेतृत्व में शीर्ष अधिकारियों के एक दल ने मुरूमसिल्ली बाँध का सघन और विस्तृत तकनीकी निरीक्षण किया। इस उच्च स्तरीय टीम में अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता तथा अनुविभागीय अधिकारी शामिल थे।
इस दौरान टीम ने बाँध के तटबंधों, संरचनात्मक स्थिति और जल निकासी (स्लुइस गेट्स) की व्यवस्था का गहन बारीकी से परीक्षण किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाँध की दीवारों या मुख्य ढांचे में किसी भी प्रकार की दरार या क्षति नहीं है।
रेनकट रोकने के लिए ‘वर्षा पूर्व’ सुरक्षा चक्र
तेज बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव (रेनकट) से बाँध के किनारों को सुरक्षित रखना एक सामान्य और अनिवार्य तकनीकी प्रक्रिया है। मुख्य अभियंता ने इसी कड़ी में वर्षा पूर्व तटबंधों के संरक्षण और मरम्मत कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। विभागीय अमला इस समय युद्धस्तर पर मुस्तैद होकर इन सुरक्षात्मक कार्यों को अंजाम दे रहा है, ताकि आने वाले समय में बाँध की कार्यक्षमता और जन सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित रहे।
भविष्य के संकट से निपटने के लिए जल प्रबंधन
इस वर्ष पानी की हर बूंद को सहेजने के लिए विभाग अभी से बेहद वैज्ञानिक और दूरदर्शी जल प्रबंधन अपना रहा है। वर्तमान में मुरूमसिल्ली बाँध अपनी क्षमता के शिखर की ओर बढ़ रहा है। यहाँ 130.07 एमसीएम (80.29 प्रतिशत) जल संग्रहण हो चुका है, जबकि मुख्य गंगरेल जलाशय में 325.95 एमसीएम (42.50 प्रतिशत) पानी दर्ज किया गया है।चूंकि मुरूमसिल्ली में जलस्तर काफी बेहतर स्थिति में है, इसलिए भविष्य में यदि कम वर्षा या अवर्षा के हालात बनते हैं, तो भी सिंचाई और पेयजल का संकट न हो, इस रणनीति के तहत मुरूमसिल्ली से नियंत्रित और सुरक्षित मात्रा में पानी गंगरेल जलाशय की ओर छोड़ा जा रहा है।
वर्ष 1923 में निर्मित मुरूमसिल्ली बाँध केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी व्यवस्था का एक ऐतिहासिक हिस्सा है। वर्तमान में इसके रख-रखाव के लिए किए जा रहे सभी कार्य पूरी तरह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।






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